koshish

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Sunday, March 6, 2011

झुंझलाहट . . . . . . . . . . .

अक्सर ऐसा होता सभी  के साथ, की जब इन्सान अपना आपा खो बैठता है और  बेकाबू की स्थिति मे आ जाता है तो उस स्थिति को कहते है गुस्सा, पर अगर वो अपने गुस्से को निकाल नहीं  पाता तो उस स्थिति को कहते है frustation   जिसे वो उसी गुस्से  की स्थिति मे जहर के घुट की तरह पी तो जाता है पर उसे पचा नहीं पाता और फिर वही से शुरू हो जाता है उसका तिल तिल  मरना .और वो मजबूर हो जाता है मरने के लिए  ......क्यों की वो कुछ कर नहीं सकता लाख  चाह कर भी ....... और कई बार न चाहते हुए भी वो  इतना मजबूर हो के वो ऐसे काम करता है कभी कभी अनजाने मे या कभी कभी  जान बुझ के भी जो उसके लिए और उससे जुड़े लोगो क लिए बहुत कष्टकारी भी  होते है,पर मज़बूरी ये आ जाती  है की क्यों की वो कुछ कर नहीं सकता कुछ कह नहीं सकता , इस लिए उस गलत रास्ते पर चलते हुए और सब सोचते हुए भी वो सब भूल जाना चाहता है और उसे उस वक़्त वो सब काम सही लगता है  जो असल मे होता गलत है....,,,, उसका ऐसा इरादा नहीं  होता की वो अपनों को दुःख पहुचाये, पर वो इतना  कुंठित हो चूका होता है की इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं मिलता उसे ........ 
कहना  तो वो बहुत कुछ चाहता है और करना भी वो बहुत कुछ चाहता है  पर ये जो मज़बूरी होती है न वो कुछ करने नहीं देती..... क्यों की उसे कही न कही ये डर भी होता है की इसका उल्टा असर न हो जाये.... और बात कही और ज्यादा न बिगड़ जाये........ और ऐसे ही तिल तिल मर के वो अपना सब ख़तम भी कर देता है....   और सब ख़तम करने का  उसे दुःख तो होता है पर इनता सब झेलने के बाद  उस  दुःख का एहसास कम हो जाता है...... 
झुंझलाहट जिसे देखा जाये तो सिर्फ एक  शब्द है.... पर असल मे अगर आप इसकी गहराई मे जाये तो ये कितनो को बना और बिगड़ सकता है.... किसी को झुंझलाहट है कुछ न कर पाने की,,,तो किसी का डर, उसकी झुंझलाहट का कारण है....
पर इन सब का एक दूसरा पहलु ये भी है  की....   अगर वक़्त रहते किसी ने सब सम्हाल लिया या  समझ लिया तो इतना कुछ होने से बच सकता है.... इन्सान गलत रस्ते पे जाने को तब शायद मजबूर ना हो............

16 comments:

  1. अच्छी कोशिश नेहा...आप ने समशया तो बता सिया लेकिन इसका समाधान भी आप से अपेक्षित है....उम्मीद है अगले लेख में मिलेगा...

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  2. बहुत ही सही विषय पर आपने बताया....झुंझलाहट व्यक्ति के निम्न व्यक्तित्व का परिचायक है...बहुत अच्छा लिखती है आप....बस यूँही लिखती रहे.....शुभकामनाएँ।

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  3. Bhot acche neha carry on.....

    .

    (N!k)

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  4. सार्थक विश्लेषण क्रोध जनित झुंझलाहट के दुष्परिणामों का.

    शुभागमन...! सुस्वागतम....!!
    शुभकामना है कि आप ब्लागलेखन के इस क्षेत्र में अधिकतम उंचाईयां हासिल कर सकें । अपने इस प्रयास में पर्याप्त सफलता तक पहुँचने के लिये आप हिन्दी के दूसरे ब्लाग्स भी देखें और अच्छा लगने पर उन्हें फालो भी करें । आप जितने अधिक ब्लाग्स को फालो करेंगे आपके अपने ब्लाग्स पर भी फालोअर्स की संख्या बढ सकेगी । प्राथमिक तौर पर मैं आपको 'नजरिया' ब्लाग की लिंक नीचे दे रहा हूँ, किसी भी नये हिन्दीभाषी ब्लागर्स के लिये इस ब्लाग पर आपको जितनी अधिक व प्रमाणिक जानकारी इसके अब तक के लेखों में एक ही स्थान पर मिल सकती है उतनी अन्यत्र शायद कहीं नहीं । आप इस ब्लाग के दि. 18-2-2011 को प्रकाशित आलेख "नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव" का अवलोकन अवश्य करें, इसपर अपनी टिप्पणीरुपी राय भी दें और अगली विशिष्ट जानकारियों के लिये इसे फालो भी अवश्य करें । निश्चय ही आपको इससे अच्छे परिणाम मिलेंगे । पुनः शुभकामनाओं सहित...
    http://najariya.blogspot.com/2011/02/blog-post_18.html

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  5. बहुत सुंदर ब्लॉग तथा सार्थक एवं प्रेरक आलेख

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  6. ब्लॉग लेखन में आपका स्वागत, हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए तथा पत्येक भारतीय लेखको को एक मंच पर लाने के लिए " भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" का गठन किया गया है. आपसे अनुरोध है कि इस मंच का followers बन हमारा उत्साहवर्धन करें , साथ ही इस मंच के लेखक बन कर हिंदी लेखन को नई दिशा दे. हम आपका इंतजार करेंगे.
    हरीश सिंह.... संस्थापक/संयोजक "भारतीय ब्लॉग लेखक मंच"
    हमारा लिंक----- www.upkhabar.in/

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  7. saadgi mein jhunjhlahat ka smagam achcha lga..

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  8. aap sabhi ka bahut bahut shukriya jo apne blog padh ke,,,, apne bahumulya comment diye.

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  9. इस नए सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  10. प्रिय नेहा जी
    स्वागतम ! सस्नेहाभिवादन !

    झुंझलाहट पर लघु आलेख पढ़ते हुए झुंझलाहट नहीं हुई यह इस पोस्ट की सफलता है … :)
    सार्थक ब्लॉगिंग के लिए शुभकामनाएं हैं …


    अभी अधिक विलंब नहीं हुआ -

    विश्व महिला दिवस की हार्दिक बधाई !
    शुभकामनाएं !!
    मंगलकामनाएं !!!

    ♥मां पत्नी बेटी बहन;देवियां हैं,चरणों पर शीश धरो!♥


    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  11. देखा बेटा लिखना लिखने से आता है

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  12. अच्छा लिखा नेहा ..... यह स्वभावगत समस्या लगती तो आम है पर है बहुत तकलीफदायक खुद के लिए भी और दूसरों के लिए भी.....

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  13. कुछ लोग जीते जी इतिहास रच जाते हैं
    कुछ लोग मर कर इतिहास बनाते हैं
    और कुछ लोग जीते जी मार दिये जाते हैं
    फिर इतिहास खुद उनसे बनता हैं
    आशा है की आगे भी मुझे असे ही नई पोस्ट पढने को मिलेंगी
    आपका ब्लॉग पसंद आया...इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी

    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-



    बहुत मार्मिक रचना..बहुत सुन्दर...होली की हार्दिक शुभकामनायें!

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