koshish

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Sunday, February 13, 2011

teekdi.............. . . .

वैसे तो आपने सुना होगा तीन तीगाडा काम बिगाड़ा.....पर यहाँ थोडा अलग हिसाब है ,आप सोच रहे होंगे कैसा हिसाब... हां तो वही बताने के लिए तो हम ये लिख रे है..
         आपको टाइटल  से अंदाजा हो रहा  होगा की तिकड़ी से related है तो तीन का खेल होगा... तो आइये शुरू करते है .......   कहानी है  ........................... नेहा,अनमता,भावना की 
..जो बचपन के दोस्त तो नहीं है  पर उनकी दोस्ती देखकर लगता यही है की बचपन से जानते है एक दुसरे को और वो साथ है करीब ढाई साल से बस और वो मिले है lucknow university के b.j .m .c प्रोग्राम मे  ...... स्वभाव मे तीनो एक दुसरे से बिल्कुल अलग पर तब भी गहरे दोस्त है...क्लास मे रोज़ नए रिश्ते बनते बिगड़ते है,पर ये तीन जस के तस है,शुरू से अब तक , ऐसा नहीं की इनके बीच लड़ाई झगडा नहीं होता,होता भी है और बोल चाल भी बंद होती है पर वही बात एक दुसरे से बिना बात किए ये रह भी नहीं पाती सो रो गा कर ,रूठे को मन कर ये फिर से चालू हो जाती है... आप सोच रहे होंगे इसमें खास क्या है,तो हम बता दे खास है इनकी जबरदस्त दोस्ती और उस दोस्ती का रंग..... तीनो मे खास है उनका मजाकिया स्वभाव.और सबकी बजाना भी पर ये काम तबी होता है जब तीनो की तिकड़ी बैठती है.... हां और साथ ही साथ इनके चेहरे पे हर वक़्त रहने वाली मीठी सी मुस्कान........जो सारा हाल बयां कर देती है.
एक है जिसके लिए कहा जाता की उसका स्वभाव है थोडा शांत,शालीन वो है नेहा और थोड़ी सी शर्मीली भी  ... तो वही दूसरी जिसका स्वभाव है थोडा चंचल,और थोडा सा गुस्सैला और हमेशा लड़ाई के लिए तैयार रहना.. वो है हमारी  भावना जी,और वही तीसरी का स्वभाव तो बस ............नटखट,talkitive ..... बिंदास रहना वो भी सबसे हट के..... वो अनमता के अलावा कोई हो ही नहीं सकता. 
जब ये तीनो मिल बैठती है तो लगता है की हा,they are full of life,and full of entertainment . इनकी दोस्ती के कई रंग भी और कई स्वाद भी है, जैसा की हर रिश्ते मे होता है... खट्टा मीठा स्वाद... और थोडा सा तीखा भी. 
     वैसे तो इनमे  दो शख्स और है जो रंग भरते है पर वो अक्सर coverage एरिया से बहार ही रहते है और वो है   ....  bhawna kapoor और pransha. जब ये पाचो साथ मे हो फिर तो आप  भूल जाइये की आपको  अब कोई notice करने वाला है ... एक दम अपने मे मस्त,दुनिया से बेखबर और जब तक साथ है ,तब तक बात्तिसी दिखती रहेगी. .... और हो भी क्यों न इनलोगों का मिलना  होता भी तो ६ महीने पे है.
आइये एक हाल ही का किस्सा बताते है आपको..जिसमे थोड़े आंसू और  बहुत सारा प्यार है. सुबह का वक़्त था रोज़ की तरह सब  लोग मिले,बात चित का सिलसिला भी शुरू हुआ ... पर न जाने अचानक से क्या हुआ की  तीनो के बीच मे थोड़ी अनबन हो गयी . और  साथ रह कर भी आपस मे बोल नहीं  रहे थे .... पर  साथ वालो को इस बात का अंदाजा नही हो पाया था... तीनो शांत थे ,,,, फिर  डार्लिंग फ्रेंड अनमता टहलते हुए युही एक गाना सुन री थी जो की थोडा दर्द भरा था.... गाना कुछ यु था ..... ये दिल ये पागल दिल मेरा क्यों बुझ गया और आवारगी............... तो अचानक गाना सुनते सुनते उसकी आँखों से आंसू आ गये और जब हमने देखा तो हम और भावना उसकी तरफ दौड़ पड़े और hug  कर लिया.. फिर क्या था हम तीनो एक दुसरे से लिपट गये और सबकी आँखों मे आंसू आ गये और पूरा माहोल सेंटी हो गया... फिर एक दुसरे को लव यू बोला ,,,सॉरी कहा......... फिर धीरे धीरे माहोल नोर्मल हुआ......... उस दिन एहसास हुआ की हम लोग कितना close आ चुके है. ...और कितना प्यार भी है हमारे बीच. ......
        धीरे धीरे कैसे ये वक़्त बीत गया पता भी नहीं चला ,और वैसे वैसे हमारी दोस्ती परवान भी चढ़ गयी ...... अब आने वाला वक़्त बताएगा.. इस दोस्ती का रंग कितना और चढ़ता  है...
हमेशा याद आएंगे ये पल,ये दोस्ती,ये मस्ती....
                                                                                                                                with lots of love...

Sunday, January 30, 2011

manish babu ki kahani hamari jubani..............

एक ऐसा शख्स हमारी क्लास का जिसे समझना थोडा मुश्किल है, जो एक अनसुलझी पहेली की तरह है और अपने आप मे एक अजीब ही कैरक्टर है.. नाम है मनीष.
Zindagi ...kaisi hai paheli, haaye
Kabhi to hansaaye kabhi ye rulaaye
Zindagi...   
  
जिनका स्टाइल अपने आप मे विचित्र है वो,कब,कहा,क्या बोल दे या क्या कर दे इसका भी कोई भरोसा नहीं.है तो वो आम इंसानों की तरह ही पर  लोगो की ऐसी तैसी करना तो जैसे उनकी hobby हो .उनका मिजाज कुछ इस तरह है की उनकी हर चीज़ एक दम extreame लेवल पर होती है. जैसे दोस्ती ,या किसी से मजाक करना या उनका गुस्सा ही क्यों न हो या बात हो रिश्ते निभाने की.पर वो सबसे जल्दी रिश्ते बनाते भी नहीं है.उनके बोलने का अंदाज़ काफी बेख़ौफ़ और बेबाक है. दोस्तों का साथ उन्हें कुछ ज्यादा भाता है .वैसे तो सभी को भाता है पर उन्हें कुछ ज्यादा ही .
उनका मिजाज कुछ यु है की,उनके ऊपर कितनी भी मुश्किलें आ जाये वो कभी जाहिर नहीं होने देते और चेहरे पे शिकन नहीं आने देते और हस्ते-मुस्कुराते रहते है .और अपने तक ही रखते भी है. वैसे वो थोड़े से frustate भी लगते है.मतलब की जैसे हर वक़्त परेशान रहना और अपने चेहरे की हँसी के पीछे अपनी परेशानी छुपाने की कोशिश करना .
टीचर्स को बिल्कुल झुक के और हाथ जोड़ के कहना 'गुरु जी प्रणाम' तो जैसे उनका स्टेटस सिम्बल  है.... और उनके स्टेटस सिम्बल मे लोगो को कमेन्ट करना भी आता है.इनसे जब आप बात करेंगे तो आप अंदाज़ा नहीं लगा सकते  की आपकी कौनसी बात पे ये महाशय क्या जवाब दे दे ... ये अक्सर वही बोलते  है जिसकी आपको उम्मीद न हो.
क्लास के शुरूआती दौर मे इनसे कोई ज्यादा बातचीत नहीं होती थी क्यों की ये भी अपने मे रहना पसंद करते थे और हम भी , पर समय के साथ साथ बातचीत का सिलसिला भी काफी बढ़ गया. और हम इनको पहले से ज्यादा जान गए .इनकी चाल को देखकर लगता है की या तो ये किसी से लड़ कर आ रहे है या जा रहे है लड़ने .मगर ऐसा होता नहीं है क्योंकि इनकी चाल का अंदाज़ ही कुछ ऐसा है.......
            कुछ व्यक्यिगत अनुभव जो अब तक के सफ़र मे रहे है इनके साथ :-
 ...अभी कुछ दिन पहले का वाक्या है.. हमें इन्टरनेट कनेक्शन लेना था तो बातों बातों मे हमने इनसे पुछा.....  तुम्हारे पास कौन सा कनेक्शन है 2G या 3G ... तो मनीष जी का जवाब था 4G ....लेना है??????????? 
   अब बताइए कोई इसके आगे क्या कहे...... ये तो था इनका एक रूप तफरी वाला .
पर इनका एक रूप ये भी है  ........................
ये वाक्या जरा पुराना है............. प्रथम सेमेस्टर के आस पास का .
उस समय हम सब उतना परिचित नहीं थे आपस मे .. क्लास के बाद ब्रेक का समय था तो हम लड़किया ऐसे ही घुमने या कह लीजिये मुड़ फ्रेश करने बहार आ गए और कुछ लडकियों के बैग क्लास मे थे जिनमे से एक हमारा  भी था,और जब कुछ टाइम बाद  वापस लौटे तो देखा हम सभी के बैग से सारे रुपये जा चुके थे...(आज तक पता नहीं चला किसने चुराए थे) हम सब हैरान परेशान हो चुके थे ये सोच कर की घर वापस कैसे जायेंगे ..तो मनीष जी आगे आये हमारी मदद के लिए और इन्होने हमें घर तक का किराया दिया... हमें यकीन नहीं था की ये भी मदद कर सकते है. क्योंकि उस वक़्त हमारे जहन मे इनके प्रति राय कुछ और ही थी ... और उस घटना के बाद से हमारी राय भी बदल गयी ... और तब से ये विश्वास  जागा की ये एक मददगार शख्स है............... और ये भी इनका एक अलग ही रूप था....
 तो अगर इनको देखा और समझा जाये तो ये ऐसे शख्स है जो  
बहुमुखी चरित्र अपने मे समेटे हुए है..........