koshish

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Tuesday, February 4, 2014

''वापसी''


काफी अर्से बाद आज सोचा की कुछ लिखा जाए ...
लेकिन सोचा क्या लिखा जाए ....
फिर सोचा कुछ भी ऐसा जो मन को अच्छा लगे ....
फिर लगा ऐसे तो मन को बहुत कुछ अच्छा लगता है ...
तो सोचा ऐसा कुछ जो खास हो अनोखा हो...
फिर आखिरकार ये समझ आया कि....................
डायलॉग बाजी.....
लैक्चर बाजी.....
बयान बाजी .....
ये-वो... हेन-तेन
सब पढ़ने में और पढ़ाने में ही अच्छा लगता है ...
  हकीकत में एप्लाई कर दो तो...
 लाइफ for sure फालूदा बन जाए ....!!!!!!!!!