koshish

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Monday, February 28, 2011

.अगर हम न होते तो क्या होता............

मानिए अगर हम ना होते तो क्या होता ...ज्यादा कुछ नहीं पर तब भी बहुत कुछ होता ....... कहना तो आसान है की हम न होते तो कुछ नहीं  होता सब जैसे खुश है वैसे रहते.......पर सच मानिए तो  ऐसा है नहीं .......हम न होते तो यकीन मानिये एक कमी होती हमारे घर मे ... कोई डांट खाने वाला नहीं  होता ना कोई ज्यादा बोलने वाला होता  सो जाहिर सी बात है घर सुना होता, हम ना होते तो हमारी माँ हम जैसी बेटी पाने का अनुभव ना प्राप्त कर सकती ,,, और ना ही  पिता जी हम जैसी  बेटी का सुख पा सकते और अगर बात भाई बहन की जाये तो उनलोगों के बारे मे थोडा दुविधा वाली स्थिति है हो सकता है वो बहुत खुश होते क्योंकी माँ बाप का प्यार उन्हें ही मिलता और ये भी हो सकता है की वो उतने खुश ना होते क्योंकी हम ना होते  उन्हें दुखी करने के लिए... या उनसे बाते करने के लिए ...... यकीन मानिये हमसे जुड़े खास  लोगो की ज़िन्दगी  मे उतनी हल चल ना होती........       अगर बात दोस्तों की करे तो यहाँ थोडा गेहेन सोचने जरुरत है क्यों की यहाँ मामला थोडा नाज़ुक है और मजेदार भी ..... हम ना होते दोस्तों की ज़िन्दगी मे तो ज़िन्दगी जीने का और उसका लुफ्त उठाने का दायरा कम हो जाता  ..... हमारे खास दोस्त हमसे अपनी बाते ना कहते ...... जो बेहद व्यक्तिगत होती है ....  शायद इतना ख़ुशमिज़ाजी भी ना होती.... हमारे दोस्तों के समूह  मे..... क्यों की हमारा मोबाईल भी ना होता मनोरंजन के लिए..... जो की एक एहम हिस्सा है .... 
अगर बात रिश्तेदारों की की जाये तो उन्हें खासा फर्क शायद ना पड़ता और तो वो लोग शायद खुश ही होते की चलो इतने नखरे करने  वाला कोई  सदस्य तो नहीं  है ...... पर कुछ तो थोड़े निराश भी होते ..... हमे न पाकर . ख़ैर  जो भी हो .......  सच तो तभी पता चलता जब हम न होते...!!!!!!!!!!!

Wednesday, February 16, 2011

GURU... . . . . . . .

Teacher यानि गुरु या और आसान शब्दों मे कहे  तो वो जो हमे सिखाता या समझाता है और वो जरुरी नहीं की हमारा वो स्कुल या कॉलेज का गुरु हो , वो कोई भी हो सकता है,जैसे की हमारा अपना,हमारा दूर  का रिश्तेदार  या राह चलता कोई भी शख्स..... वैसे हम कई बार खुद से भी कई चीज़े सीखते है..कई बार हमारी ज़िन्दगी ही जाने अनजाने मे  हमे बहुत कुछ सिखा जाती है पर उस वक़्त हम समझ  नही पाते. वैसे हमारी ज़िन्दगी जैसा टीचर कोई हो नही सकता क्योंकी  वो हमारे जन्म लेने से हमारी मौत तक हमारे साथ रहती है और हमे हर  पल कुछ न कुछ   सिखाती है. और साथ ही हमे ये भी सिखाती है की हमे किसी भी हाल मे कही रुकना नही चाहिए बस चलते रहना चाहिए ...........पर ये भी सच है की हमें  अहसास तब होता है उस सीख का , जब देर हो चुकी  होती है .
वैसे तो अगर गुरु की बात की जाये तो हमारे माँ बाप भी गुरु होते है जो हमारा बहुत साथ देते है ... और हमे सिखाते है,समझाते है ... ज़िन्दगी भर.
टीचर की बात करते करते , मुझे कुछ धुन्दला सा याद आ  रहा है ....... काफी पुरानी बात है जब हम 7th या,8th मे होंगे हमारी एक हिंदी की मैम हुआ करती थी जो हमे म्यूजिक भी सिखाती थी ,,,न जाने उन्हें हम मे क्या दिखता था की कोई भी छोटा बड़ा स्कूल मे function होता था तो वो हमारे पीछे ही पड़ जाती थी गाने के लिए .... और हम उतना ही उनसे भागते थे ,, और कोशिश करते थे की उनके सामने ना आ पाए.... पर वो तो टीचर थी जो हमे कही से भी ढूंड लेती थी और गाना भी ग़वा ही लेती थी ,हम बड़ा परेशान रहते थे की उन्हें कोई और क्यों नही मिलता है...... पर आज याद आती है उनकी,की एक तरह से वो अच्छा  ही करती थी .... जो हमे कुछ सिखाना चाहती थी पर हम भागते थे.
  वैसे टीचर का जिक्र आते ही ,,,,, वो क्लास रूम ,वो खौफ ,वो डांट,वो स्कूल के दिन, सब सामने आने लगता है,,.... और कुछ लोगो का चेहरा भी सामने घुमने लगता है जिससे  हम या  तो डरते थे या बहुत मानते थे ....आज वो भले हमारे साथ न हो लेकिन  उनकी  कुछ अच्छी  यादे तो कुछ कडवी यादे है जो सब याद कर के  आँखों के सामने एक जाल बना लेती है.और हमे सोचने पे मजबूर कर देती है की जो बीत गया वो पल अच्छा  था या जो वक़्त अभी है वो अच्छा  है ....................
 वक़्त चाहे जो  भी हो,हम चाहे जहाँ भी रहे, कैसे भी रहे ........... पर हमारी ज़िन्दगी हमे हर कदम पे कुछ न कुछ सिखाती रहेगी और अहसास दिलाती रहेगी की सीख़ने की कोई उम्र कोई समय नहीं होता ... बस हालात  होते है  जो सही गलत का अंदाजा कराते है....
....TEACHING IS THE PROFESSION THAT TEACHES ALL THE PROFESSIONS.

Sunday, February 13, 2011

teekdi.............. . . .

वैसे तो आपने सुना होगा तीन तीगाडा काम बिगाड़ा.....पर यहाँ थोडा अलग हिसाब है ,आप सोच रहे होंगे कैसा हिसाब... हां तो वही बताने के लिए तो हम ये लिख रे है..
         आपको टाइटल  से अंदाजा हो रहा  होगा की तिकड़ी से related है तो तीन का खेल होगा... तो आइये शुरू करते है .......   कहानी है  ........................... नेहा,अनमता,भावना की 
..जो बचपन के दोस्त तो नहीं है  पर उनकी दोस्ती देखकर लगता यही है की बचपन से जानते है एक दुसरे को और वो साथ है करीब ढाई साल से बस और वो मिले है lucknow university के b.j .m .c प्रोग्राम मे  ...... स्वभाव मे तीनो एक दुसरे से बिल्कुल अलग पर तब भी गहरे दोस्त है...क्लास मे रोज़ नए रिश्ते बनते बिगड़ते है,पर ये तीन जस के तस है,शुरू से अब तक , ऐसा नहीं की इनके बीच लड़ाई झगडा नहीं होता,होता भी है और बोल चाल भी बंद होती है पर वही बात एक दुसरे से बिना बात किए ये रह भी नहीं पाती सो रो गा कर ,रूठे को मन कर ये फिर से चालू हो जाती है... आप सोच रहे होंगे इसमें खास क्या है,तो हम बता दे खास है इनकी जबरदस्त दोस्ती और उस दोस्ती का रंग..... तीनो मे खास है उनका मजाकिया स्वभाव.और सबकी बजाना भी पर ये काम तबी होता है जब तीनो की तिकड़ी बैठती है.... हां और साथ ही साथ इनके चेहरे पे हर वक़्त रहने वाली मीठी सी मुस्कान........जो सारा हाल बयां कर देती है.
एक है जिसके लिए कहा जाता की उसका स्वभाव है थोडा शांत,शालीन वो है नेहा और थोड़ी सी शर्मीली भी  ... तो वही दूसरी जिसका स्वभाव है थोडा चंचल,और थोडा सा गुस्सैला और हमेशा लड़ाई के लिए तैयार रहना.. वो है हमारी  भावना जी,और वही तीसरी का स्वभाव तो बस ............नटखट,talkitive ..... बिंदास रहना वो भी सबसे हट के..... वो अनमता के अलावा कोई हो ही नहीं सकता. 
जब ये तीनो मिल बैठती है तो लगता है की हा,they are full of life,and full of entertainment . इनकी दोस्ती के कई रंग भी और कई स्वाद भी है, जैसा की हर रिश्ते मे होता है... खट्टा मीठा स्वाद... और थोडा सा तीखा भी. 
     वैसे तो इनमे  दो शख्स और है जो रंग भरते है पर वो अक्सर coverage एरिया से बहार ही रहते है और वो है   ....  bhawna kapoor और pransha. जब ये पाचो साथ मे हो फिर तो आप  भूल जाइये की आपको  अब कोई notice करने वाला है ... एक दम अपने मे मस्त,दुनिया से बेखबर और जब तक साथ है ,तब तक बात्तिसी दिखती रहेगी. .... और हो भी क्यों न इनलोगों का मिलना  होता भी तो ६ महीने पे है.
आइये एक हाल ही का किस्सा बताते है आपको..जिसमे थोड़े आंसू और  बहुत सारा प्यार है. सुबह का वक़्त था रोज़ की तरह सब  लोग मिले,बात चित का सिलसिला भी शुरू हुआ ... पर न जाने अचानक से क्या हुआ की  तीनो के बीच मे थोड़ी अनबन हो गयी . और  साथ रह कर भी आपस मे बोल नहीं  रहे थे .... पर  साथ वालो को इस बात का अंदाजा नही हो पाया था... तीनो शांत थे ,,,, फिर  डार्लिंग फ्रेंड अनमता टहलते हुए युही एक गाना सुन री थी जो की थोडा दर्द भरा था.... गाना कुछ यु था ..... ये दिल ये पागल दिल मेरा क्यों बुझ गया और आवारगी............... तो अचानक गाना सुनते सुनते उसकी आँखों से आंसू आ गये और जब हमने देखा तो हम और भावना उसकी तरफ दौड़ पड़े और hug  कर लिया.. फिर क्या था हम तीनो एक दुसरे से लिपट गये और सबकी आँखों मे आंसू आ गये और पूरा माहोल सेंटी हो गया... फिर एक दुसरे को लव यू बोला ,,,सॉरी कहा......... फिर धीरे धीरे माहोल नोर्मल हुआ......... उस दिन एहसास हुआ की हम लोग कितना close आ चुके है. ...और कितना प्यार भी है हमारे बीच. ......
        धीरे धीरे कैसे ये वक़्त बीत गया पता भी नहीं चला ,और वैसे वैसे हमारी दोस्ती परवान भी चढ़ गयी ...... अब आने वाला वक़्त बताएगा.. इस दोस्ती का रंग कितना और चढ़ता  है...
हमेशा याद आएंगे ये पल,ये दोस्ती,ये मस्ती....
                                                                                                                                with lots of love...