मानिए अगर हम ना होते तो क्या होता ...ज्यादा कुछ नहीं पर तब भी बहुत कुछ होता ....... कहना तो आसान है की हम न होते तो कुछ नहीं होता सब जैसे खुश है वैसे रहते.......पर सच मानिए तो ऐसा है नहीं .......हम न होते तो यकीन मानिये एक कमी होती हमारे घर मे ... कोई डांट खाने वाला नहीं होता ना कोई ज्यादा बोलने वाला होता सो जाहिर सी बात है घर सुना होता, हम ना होते तो हमारी माँ हम जैसी बेटी पाने का अनुभव ना प्राप्त कर सकती ,,, और ना ही पिता जी हम जैसी बेटी का सुख पा सकते और अगर बात भाई बहन की जाये तो उनलोगों के बारे मे थोडा दुविधा वाली स्थिति है हो सकता है वो बहुत खुश होते क्योंकी माँ बाप का प्यार उन्हें ही मिलता और ये भी हो सकता है की वो उतने खुश ना होते क्योंकी हम ना होते उन्हें दुखी करने के लिए... या उनसे बाते करने के लिए ...... यकीन मानिये हमसे जुड़े खास लोगो की ज़िन्दगी मे उतनी हल चल ना होती........ अगर बात दोस्तों की करे तो यहाँ थोडा गेहेन सोचने जरुरत है क्यों की यहाँ मामला थोडा नाज़ुक है और मजेदार भी ..... हम ना होते दोस्तों की ज़िन्दगी मे तो ज़िन्दगी जीने का और उसका लुफ्त उठाने का दायरा कम हो जाता ..... हमारे खास दोस्त हमसे अपनी बाते ना कहते ...... जो बेहद व्यक्तिगत होती है .... शायद इतना ख़ुशमिज़ाजी भी ना होती.... हमारे दोस्तों के समूह मे..... क्यों की हमारा मोबाईल भी ना होता मनोरंजन के लिए..... जो की एक एहम हिस्सा है ....
अगर बात रिश्तेदारों की की जाये तो उन्हें खासा फर्क शायद ना पड़ता और तो वो लोग शायद खुश ही होते की चलो इतने नखरे करने वाला कोई सदस्य तो नहीं है ...... पर कुछ तो थोड़े निराश भी होते ..... हमे न पाकर . ख़ैर जो भी हो ....... सच तो तभी पता चलता जब हम न होते...!!!!!!!!!!!

