koshish

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Sunday, January 30, 2011

manish babu ki kahani hamari jubani..............

एक ऐसा शख्स हमारी क्लास का जिसे समझना थोडा मुश्किल है, जो एक अनसुलझी पहेली की तरह है और अपने आप मे एक अजीब ही कैरक्टर है.. नाम है मनीष.
Zindagi ...kaisi hai paheli, haaye
Kabhi to hansaaye kabhi ye rulaaye
Zindagi...   
  
जिनका स्टाइल अपने आप मे विचित्र है वो,कब,कहा,क्या बोल दे या क्या कर दे इसका भी कोई भरोसा नहीं.है तो वो आम इंसानों की तरह ही पर  लोगो की ऐसी तैसी करना तो जैसे उनकी hobby हो .उनका मिजाज कुछ इस तरह है की उनकी हर चीज़ एक दम extreame लेवल पर होती है. जैसे दोस्ती ,या किसी से मजाक करना या उनका गुस्सा ही क्यों न हो या बात हो रिश्ते निभाने की.पर वो सबसे जल्दी रिश्ते बनाते भी नहीं है.उनके बोलने का अंदाज़ काफी बेख़ौफ़ और बेबाक है. दोस्तों का साथ उन्हें कुछ ज्यादा भाता है .वैसे तो सभी को भाता है पर उन्हें कुछ ज्यादा ही .
उनका मिजाज कुछ यु है की,उनके ऊपर कितनी भी मुश्किलें आ जाये वो कभी जाहिर नहीं होने देते और चेहरे पे शिकन नहीं आने देते और हस्ते-मुस्कुराते रहते है .और अपने तक ही रखते भी है. वैसे वो थोड़े से frustate भी लगते है.मतलब की जैसे हर वक़्त परेशान रहना और अपने चेहरे की हँसी के पीछे अपनी परेशानी छुपाने की कोशिश करना .
टीचर्स को बिल्कुल झुक के और हाथ जोड़ के कहना 'गुरु जी प्रणाम' तो जैसे उनका स्टेटस सिम्बल  है.... और उनके स्टेटस सिम्बल मे लोगो को कमेन्ट करना भी आता है.इनसे जब आप बात करेंगे तो आप अंदाज़ा नहीं लगा सकते  की आपकी कौनसी बात पे ये महाशय क्या जवाब दे दे ... ये अक्सर वही बोलते  है जिसकी आपको उम्मीद न हो.
क्लास के शुरूआती दौर मे इनसे कोई ज्यादा बातचीत नहीं होती थी क्यों की ये भी अपने मे रहना पसंद करते थे और हम भी , पर समय के साथ साथ बातचीत का सिलसिला भी काफी बढ़ गया. और हम इनको पहले से ज्यादा जान गए .इनकी चाल को देखकर लगता है की या तो ये किसी से लड़ कर आ रहे है या जा रहे है लड़ने .मगर ऐसा होता नहीं है क्योंकि इनकी चाल का अंदाज़ ही कुछ ऐसा है.......
            कुछ व्यक्यिगत अनुभव जो अब तक के सफ़र मे रहे है इनके साथ :-
 ...अभी कुछ दिन पहले का वाक्या है.. हमें इन्टरनेट कनेक्शन लेना था तो बातों बातों मे हमने इनसे पुछा.....  तुम्हारे पास कौन सा कनेक्शन है 2G या 3G ... तो मनीष जी का जवाब था 4G ....लेना है??????????? 
   अब बताइए कोई इसके आगे क्या कहे...... ये तो था इनका एक रूप तफरी वाला .
पर इनका एक रूप ये भी है  ........................
ये वाक्या जरा पुराना है............. प्रथम सेमेस्टर के आस पास का .
उस समय हम सब उतना परिचित नहीं थे आपस मे .. क्लास के बाद ब्रेक का समय था तो हम लड़किया ऐसे ही घुमने या कह लीजिये मुड़ फ्रेश करने बहार आ गए और कुछ लडकियों के बैग क्लास मे थे जिनमे से एक हमारा  भी था,और जब कुछ टाइम बाद  वापस लौटे तो देखा हम सभी के बैग से सारे रुपये जा चुके थे...(आज तक पता नहीं चला किसने चुराए थे) हम सब हैरान परेशान हो चुके थे ये सोच कर की घर वापस कैसे जायेंगे ..तो मनीष जी आगे आये हमारी मदद के लिए और इन्होने हमें घर तक का किराया दिया... हमें यकीन नहीं था की ये भी मदद कर सकते है. क्योंकि उस वक़्त हमारे जहन मे इनके प्रति राय कुछ और ही थी ... और उस घटना के बाद से हमारी राय भी बदल गयी ... और तब से ये विश्वास  जागा की ये एक मददगार शख्स है............... और ये भी इनका एक अलग ही रूप था....
 तो अगर इनको देखा और समझा जाये तो ये ऐसे शख्स है जो  
बहुमुखी चरित्र अपने मे समेटे हुए है..........